तनाव

तनाव, उदासीनता, डिप्रेशन!

तनाव, जो कुछ समय पहले तक एक आम विषयमात्र था, आज एक आम बीमारी हो गई है, विशेषकर शहरी इलाकों में रहने वाले लोगो बीच | विचारको का मानना है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता और विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों का एक दुष्परिणाम तनाव रहा है जो कि आधुनिकता की एक व्यापक महामारी बन गई है |
मनुष्य तनावग्रस्त तब होता है जब वह मनोवैज्ञानिक संतुलन खो बैठता है | और मनुष्य अपना मनोवैज्ञानिक संतुलन तब खोता है जब वह जैविकघड़ी की विकार (डिसऑर्डर ऑफ़ बायोलॉजिकल क्लॉक) का शिकार हो जाता है |और तनाव के शिकार होते ही मनुष्य के मस्तिष्क में ख़ुशी प्रदान करने वाली फील गुड हार्मोन #डोपामिन का क्षय होने लगता है, डोपामिन का स्तर लगातार कम होते चला जाता है और मनुष्य उदास रहने लगता है |
तनावग्रस्त होने का मुख्य दस कारण है:-
1.घूम्रपान, 2.नींद पूरी ना करना, 3.खान पान का समय पर और सही ना होना, 4.मुश्किलों से घबरा जाना, 5.किसी दवाब में लगातार रहना, 6.विभिन्न प्रदुषण, 7.व्ययाम ना करना, 8.किसी प्रकार की शंका या चिंता में जीना,9.इच्छा पूर्ण होते ना देखना, 10.हर छन असंतोष में जीना |
हालांकि उपरोक्त की गई बातो में बिंदु संख्या चार व पाँच के नकारात्मक के संग-संग सकारात्मक पहलू भी है जैसे कि एक सफल व्यक्ति की सकारात्मक सोच कहती है कि जीवन में आए मुश्किलों ने हमें यहाँ तक पहुंचा दिया और असफल व्यक्ति भी यही बात कहता है जो नकारात्मक सोच दर्शाती है | तो दवाब में कई लोग बेहतर तरीके से कार्य को पूर्ण कर लेते है कई लोग नहीं कर पाते है |
तनावरहित जीवन के ये लक्षण क्रमशः हमारे व्यवहार में दिखने लगते है :-
उत्साह में कमी, डर कर जीना, किसी से बात चित ना करना, शंका में रहना, आत्मविश्वास खोना, लोगो से दूरी बना लेना (अकेले रहना),सही गलत बीच निर्णय ना ले पाना,निर्णय लेने में संकोची होना, हर समय चिड़चिड़ा रहना, बात-बात पर गुस्सा हो जाना, कभी-कभी अपने आप धड़कन की गति का बढ़ जाना, पाचनशक्ति का मंद होना, आदि |
मनुष्यों के जीवन पर वो जो भी कार्य करता है उसका भी प्रभाव पड़ता ही है तो किसी भी कार्य को करने से पहले खुद से कुछ सवाल जवाब कर लेना चाहिए, जैसे कि :-
1.मैं उस कार्य में शामिल जोखिम उठाने की ि स्थति में हूँ या नहीं ?
2.उस कार्य को करते हुए मैं अपने जीवन को संतुलित रख पाउँगा या नहीं ?
3.उस कार्य को करने से भविष्य में प्रगति की क्या संभावनाएँ हैं ?
4.कार्य मेंरी रूचि का है या नहीं या कार्य में मेरी रूचि लम्बे समय तक रहेगी या नहीं ?
5.उस कार्य को करने के लिए जितनी क्षमता चाहिए,उतनी आत्मविश्वास अपने अंदर विकसित कर सकता हूँ या नहीं ?
6.वह कार्य स्वयं,परिवार, समाज व देश के लिए अच्छा है या नहीं ; या उस कार्य को करने से खुद को या किसी अन्य लोगो को कोई हानि तो नहीं ?
अतः तनाव में जीवन जीने के बहुत कारण है मगर तनाव से बचे रहने के बहुत ही सरल तरीके है :-
1.ध्यान, योगा (मैडिटेशन) करना |
2.रिश्तेदारों व मित्रो से बात-चित करते रहना |
3.वैसे चीजों की लत (आदत )ना लगाना जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो |
4.भविष्य के बदले वर्तमान में जीना |
5.अच्छे बुरे चीजों को अपनी डायरी में लिखना |
6.समय पर भोजन ग्रहण करना तथा सात घंटे की नींद पूर्ण करना |
7.अच्छे संगीत सुनना, कही घूमने जाना मगर अभी नहीं अभी कोरोना विषाणु से बचना है |
8.किसी शंका या चिंता में ना रहना |
9.जागरूक, धैर्यवान व उत्साही बने रहना |
10.हर नकारात्मक विचारों से दूरी बनाये रखना |
*मनोरंजन बिना तो जीवन संभव ही नहीं ¡!
*शारीरिक मजबूती संग मानसिक मजबूती का भी होना अति आवश्यकता ¡!

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