संक्षिप्त लेख संख्या :- तेरह, भोजन और स्वास्थ्य !
भोजन वह बुनियादी सामग्री है जिसकी पृथ्वी पर बसे पूरे जीवसृष्टी के लिए प्रमुख अावश्यकताओं में से एक है|भोजन मानव जीवन का वह प्रमुख घटक है जिसकी शारीरिक व मानसिक विकास के लिए अति आवश्यकता होती है|स्वस्थ व पोष्टीक आहार हमें स्वस्थ मन प्रदान करता है, स्वस्थ मन – स्वस्थ तन और स्वस्थ तन – स्वस्थ जीवन प्रदान करता है | विज्ञान के अनुसार मानव तन को स्वस्थ रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जैसे कि 1. शक्तिदायक भोजन – कार्बोहाइड्रेट तथा वसा युक्त भोजन, 2. शरीर निर्माण यानि प्रोटीन युक्त भोजन, 3. शरीर को संरक्षण देने वाला भोजन यानि कि खनिज, कैल्शियम व विटामिन युक्त भोजन (विटामिन के कई प्रकार होते है, जैसे – विटामिन ‘C’ इम्युनिटी बुस्ट का कार्य करती है जों साईट्रिक फ़ूड नींबू, संतरा, दही, आवला आदि में पायी जाती है, विटामिन ‘D’ (सूर्य की रौशनी ) जों हमारी दांतो और हड्डियों को मजबूती प्रदान करती है, विटामिन ‘E’, ‘K’ आदि )| आमतौर पर सभी प्रकार के फल, हरी व पत्तेदार सब्जियां, अनाज (चावल, चपाती ), दालें, दूध और दूध से बनी भोज्य पदार्थ एक अच्छे खाद्य पदार्थ की श्रेणी में आती है, जिससे कि मानव शरीर की शारीरिक व मानसिक विकास की महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है |
महान ग्रंथ गीता के अनुसार भोजन को तीन भागो में बाटा गया है :-
1. राजसिक भोजन – जों हमारे मन को चंचल बनाता है, उत्तेजित करता है | जैसे – अत्यधिक तेलिय पदार्थ (ऑयली फ़ूड), मिर्च माशालेदार भोजन, तेज नमक, सभी प्रकार के फ़ास्ट/जंक फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, केक-पेस्ट्री, चाय-कॉफ़ी, आदि |
ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार के अधिक व बराबर भोजन करने वाले लोगों में धैर्य (पेशेंस) की कमी रहती है और शरीर बीमारी के चपेट में जल्द आ जाती है |
2. तामसिक भोजन – यह हमारे मन के अंदर आलस, क्रोध, मन-मस्तिष्क-शरीर में शून्य की स्थिति तथा बीमारी को बढ़ावा देती है | जैसे – शराब, सिगरेट कोकीन, चरस, गांजा, भाँग, अफीम, तम्बाकू (सभी प्रकार के मादक पदार्थ ), मांसाहारी भोजन , अधिक देर का बना हुआ भोजन, आदि |
वास्तव में किसी भी प्रकार के भोजन, ख़ासकर राजसिक/तामसिक भोजन का अत्यधिक सेवन करने से हमारे मन-मस्तिष्क पर तामसिक प्रभाव ही छोड़ता है |
3. सात्विक भोजन – इस प्रकार के भोजन मन को शांति प्रदान करता है | हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है | हमें धैर्यवान व बलवान बनाता है | यह हमारे तन, मन और जीवन को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है | जैसे – सभी प्रकार के फल-सब्जी, दूध, दही व दूध से बने खाद्य पदार्थ , दाल, चावल, रोटी, शहद, ऐसा भोजन जिसमें तेल-मशाला-बटर की कमी हो, आदि | ये सभी हल्के भोज्य पदार्थ कहलाते है |
अब हम बात करते है कि हमारी संस्कृति, रीति -रिवाज़ हमें कैसे सकारात्मक रखती है, हमारे तन मन को स्वस्थ रखती है :- जब हम कोई पर्व मनाते है तो राजसिक और तामसिक भोजन से दूरी बनाते है, साफ सफाई का विशेष ध्यान रखते है|हम उपवास भी करते है, जिसपर मेडिकल साइंस भी कहती है कि हमें एक दिन की साप्ताहिक उपवास भी करनी चाहिए, जिससे शरीर की घर्षण से आतंरिक विकार मल मूत्र के द्वारा बाहर आ जाए या फिर हम उसके लिए प्रतिदिन योगा/व्यायाम करते है|इन सब चीजों से हमारा शरीर हल्का रहता है, हम नकारात्मक विचारों से दूर रह पाते है|भारत त्योहारों का देश है, त्यौहार कठिनाई, पीड़ा तथा तनाव को भुलाने का साधन भी होता है|हर पर्व में कुछ नियम, बंधन होती है, जिसे हर कोई उस बंधनों की रक्षा कर अर्थात अपनी संस्कृति का पालन कर अनुशासित रूप में मनाते है, जहां पारिवारिक एकतामें भी आपसी सामंजस्य बना रहता है|और हम अनुशासित व सकारात्मक जीवन व्यतीत कर पाते है|त्योहारों से एक नई आशा जगती है, कुछ अच्छा होने का उम्मीद बना रहता है| जों भी चीज हमारे पास एक ही है और जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे साथ होगी तो उसका ख्याल विशेष रूप से रखना ही होगा|स्वास्थ्य को लेकर खुद को स्वार्थी बनाना होगा|40-45 वर्ष तक खान-पान, व्यायाम आदि का ख्याल ना रखने का पता नहीं चलता है, उसके बाद हम धीरे-धीरे आम शारीरिक समस्या का शिकार होने लगते है और डॉक्टर, हॉस्पिटल का चक्कर लगाने लगते है|40-45 वर्ष तक हम जितना मेहनत करते है, खुद को तपाते है तो उसका क्या अर्थ ? अगर हम बीमार पड़ते है तो हमारे साथ घर के अन्य लोगों की भी भागीदारी हो जाती है|और मध्यम वर्गीय परिवार अपनी ही तरक्की पर बाधा पहुंचाने का कार्य करती है| हमारे प्रतिदिन की खान-पान में पानी का भी विशेष महत्व है|एक स्वस्थ और व्यसक व्यक्ति को 24 घंटे में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीना चाहिए, इसके अलावा लोगों की शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है|सुबह -सुबह खाली पेट पानी पीनी चाहिए|खाना खाने वक्त कम से कम पानी पीनी चाहिए और भोजन ग्रहण करने के 30 से 45 मिनट बाद ही पानी पीनी चाहिए| आज बाजार में अधिकांश भोजन सामग्री पर केमिकल का प्रभाव रहता है |हम जों भी खाते पीते है, उस पर अब रासायनिक खाद्य पदार्थ का अधिक मिश्रण होने लगा है|हमें विदेशी खान-पान, भोजन सामग्री का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए| हम कुछ भी रेडीमेड भोजन सामग्री खरीदते है तो हमें रेडीमेड वस्तु पर अंकित एक्सपायरी डेट और बेस्ट बिफोर डेट में अंतर पता होना चाहिए -किसी भी भोजन सामग्री पर अंकित एक्सपायरी डेट यह बतलाती है कि मैन्युफैक्चरिंग डेट से एक्सपायरी डेट तक के बीच भोजन की क्वालिटी/फ्लेवर में ज्यादा बदलाव नहीं होती है, जैसे – बिस्किट, टॉफ़ी, कोल्डड्रिंक आदि|वहीं किसी भी भोजन सामग्री पर अंकित बेस्ट बिफोर डेट यह दर्शाती है कि मैन्युफैक्चरिंग डेट से बेस्ट बिफोर डेट तक पहुंचने में धीरे-धीरे क्वालिटी/फ्लेवर/स्वाद में कमी आते जाती है, जैसे मिठाई, ब्रेड, केक/पेस्ट्री आदि|किसी भी खान-पान के पदार्थ पर अंकित बार कोड यह दर्शाती है कि इसे FSSAI (FOOD SAFETY & STANDARD AUTHORITY OF INDIA) द्वारा लाइसेंस प्रदान की गई है, इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं है|
कोरोना काल ने हमें बतलाया कि जिसकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी वो लम्बे समय तक जीवित रह पाएगा, अगर वो किसी प्रकार के राजनीति, हिंसा, ईर्ष्या, नेपोटिज्म, आपदा आदि का शिकार ना हुआ तो|काफ़ी शतर्कता के बाद भी कभी -कभी हम बीमार हो जाते है या हो सकते है, इसका मतलब यह नहीं कि हम जितना कोशिश कर सकते है उतना कोशिश करे ही ना| इस दुनियां में ऐसे कई सारे इंसान है, जिनको दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता है|हम मनुष्य को छोड़कर बाकि अन्य कई जीव प्राणी भी भोजन के लिए तरसती है, लड़ती रहती है|इसलिए हमें भोजन के महत्व को समझते हुए भोजन का सम्मान करना चाहिए, भोजन उतना ही लेना/खाना चाहिए जितने से अपना पेट भर जाए|हमें किसानो की बेज्जती नहीं करनी चाहिए, भोजन की बर्बादी नहीं करनी चाहिए… ✍️ -बाबुल