जम्मू

संक्षिप्त लेख संख्या :- चौदह, जम्मू और कश्मीर विशेष ! भारत ही नहीं समुच्चे पृथ्वी की स्वर्ग मानी जाने वाली जम्मू और कश्मीर में हिमालय की उंची चोटियां, नदियां, हिमनद/हिमखंड, झील, कश्मीर की घाटी,सदाबहार वन इत्यादि कई रमणीक प्राकृतिक सौन्दर्य का भंडार रूप जम्मू और कश्मीर लोगों को काफ़ी लुभाती है|यहां की ठंडी हसीन वादियों में अक्टूबर से मार्च तक बर्फ की वर्षा (हिमपात) का दृश्य पर्यटको को काफ़ी मनमोहती है|कश्मीर सफ़ेद बर्फ से ढका हुआ दिखाई पड़ता है जों मानो मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है | कश्मीर कश्मीरी शाल,केसर, सेब व सूखे फल के लिए भी काफ़ी प्रसिद्ध है | यहां कटरा के त्रिकुट पर्वत पर स्थित माता रानी वैष्णो देवी तथा अमरनाथ में हर वर्ष सावन महीने में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग / स्वयंभू हिमलिंग के निर्मित होने का दर्शन करने हेतु हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दार्शनिक स्थल का केंद्र है | जम्मू कश्मीर की राजधानी मौसम आधारित है, मई से अक्टूबर गर्मियों में श्रीनगर और नवंबर से अप्रैल सर्दियों में जम्मू होती है | समय था मार्च 2015 का जब पहली बार एक स्कीइंग कैंप हेतु इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्कीइंग एंड माउंटेंनियरिंग – गुलमर्ग के लिए जम्मू और कश्मीर के प्रांगण में कदम रखा था | छुकछुक गाड़ी सर्वप्रथम हमें जम्मू पहुंचाई, फिर वहां से बस द्वारा चारो दिशाओ को निहारते हुए हम बारामूला जिले में फूलो के प्रदेश के नाम से मशहूर गुलमर्ग/गौरीमर्ग पहुँचे | बर्फ के गोद में स्की के साथ थोड़ा धुन छेड़ते हुए, सभी ट्रेनी आपस में मस्ती करते हुए, अंत में अलग-अलग राज्यों से आए ट्रेनी कुछ नाच गान के साथ अपने-अपने तरीको से कभी ना भूलने वाली कई हसीन पलो को यादों में कैद कर हम सभी एक भाग्यशाली ट्रेनी के रूप में वापिस हो लिए थे| क्योंकि जम्मू और कश्मीर में लोगों का जीवन सुरक्षित नहीं रहता था और आए दिन वहां पर कभी भी किसी भी प्रकार का हमला होते रहता था | भारत के आजादी के बाद से जम्मू और कश्मीर का हाल एक राज्य के रूप में और 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 व 35अ को निरस्त करने के बाद 31 अक्टूबर से एक केंद्रशासित प्रदेश के रूप में बहुत बड़ा अंतर दिखने को मिल रहा है (अनुच्छेद 370 व 35A की विस्तृत जानकारी को गूगल/यूट्यूब पर पढ़ा सुना जा सकता है)| वर्ष 1989 में कश्मीर में घटी बहुत ही मार्मिक नरसंहार को ‘द कश्मीर फाइल्स’ चलचित्र से बेहतर समझा जा सकता है कि कैसे लोगों को कीड़े मकोरे की तरह मारा गया और साथ ही कैसे वहां की मूलनिवासी लगभग 4 से 5 लाख कश्मीरी पंडितो को पलायन करना पड़ा | वर्तमान समय में जम्मू और कश्मीर में केंद्र शासित सरकार द्वारा वर्ष 2022 से हर वर्ष 23 सितम्बर को यानी कि महाराजा हरि सिंह की जयंती पर जम्मू और कश्मीर में सरकारी छुट्टी की घोषणा से स्थानीय लोगों बीच हर्ष का वातावरण बना हुआ है | भारत के स्वतंत्रता के समय महाराज हरि सिंह डोगरा यहां के शासक थे, जों अपने प्रदेश को स्वतंत्र रख़ना चाहते थे मगर पाकिस्तान के हमले के कारण जम्मू और कश्मीर को भारत में विलय कर दिया गया | मगर जब भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना पर हमला करते हुए कश्मीर के इलाकों को मुक्त कराते आगे बढ़ रहीं थी कि भारत की तत्कालीन केंद्र सरकार के भारतीय सेना की सलाह के विपरीत ढीलापन रवैया के कारण पाकिस्तान ने घुसपैठ करके कश्मीर के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया जों पाकिस्तान औक्यूपाइड कश्मीर कहलाता है | साथ ही 1962 में भारत चीन युद्ध के बाद कश्मीर के कुछ हिस्सों पर चीन ने भी कब्जा कर लिया जिसे अक्साई चीन कहा जाता है |        पाकिस्तान द्वारा समुच्चे कश्मीर पर अपना अधिकार ज़माने के वजह से आए दिन कश्मीर में हमले होते रहते थे और कश्मीर में संघर्ष की जड़ में इस्लाम की कट्टरपंथी सोच ही है जों भारत की आजादी के समय से ही धीरे-धीरे 1980 के दशक के अंत में कट्टरता सामने आई और उसी समय जिहाद शब्द को हवा दी गई |इस बात से भी नहीं नाकारा जा सकता कि कश्मीर सहित समुच्चे भारत में इस्लाम की कट्टरपंथी सोच या जिहाद को हवा पानी देने का कार्य में अन्य विदेशी ताकतों का हाथ ना हो | हालांकि वर्तमान केंद्र सरकार की पहल से जम्मू कश्मीर की हालत धीरे-धीरे पहले से बेहतर हो रहीं जों देश हित के लिए काबिले तारीफ है…

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