विवाह

चित्र हमेशा कीमती पलो को उजागर करती हैं | जैसा कि हम सभी जानते हैं हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य अपने सम्पूर्ण जीवन काल में कुल सोलह संस्कारो को पूर्ण कर जीवन को पूर्णरूप से व्यतीत करते हैं | जिसमे विवाह पंद्रहवा संस्कार हैं और इस परंपरा को मनुष्य बड़े ही धूमधाम से मनाता हैं |कुछ अपवाद व्यक्ति को छोड़ हर मनुष्य खुद भी इस पावन परिणय के बंधन में बंधते हैं और कइयों के इस परम्परा में शामिल हो , उस ख़ुशी के पल में सरिक हो उदहारण बनते आ रहें हैं | वैदिक काल से पूर्व जब हमारा समाज संगठित नहीं था तो इस समय उच्छृंखल यौनाचार था जैसा कि आज भी जानवर समुदाय में होता हैं | कालांतर में हमारे ऋषि मनीषियों ने पारिवारिक एकता व अनुशासित जीवन के अलावा इस उच्छृंखलता यौनाचार को भी समाप्त करने के लिए विवाह संस्कार की स्थापना करके समाज को संगठित एवं नियमबद्ध करने का प्रयास किए | हमारे ऋषि मुनियो द्वारा विभाजित विवाह के कुल आठ प्रकार के रीति रिवाजो में से हम और हमारा समाज पिछले कई वर्षो से ब्रह्म विवाह के अंतर्गत तय विधि को मानकर इसके हिस्से बनते आ रहें हैं | जिसमे वर वधु और वर वधु के सगे सम्बन्धी एक दूसरे के पसंद नापसंद में तालमेल बिठा इसे प्रेमिल रूप प्रदान कर दोनों पक्षो में परस्पर सहमति के पश्चात सदा के लिए एक दूसरे के हर सुख-दुःख का हिस्सा बन जाता हैं और इसके साथ ही मनुष्य अपने गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर जाता हैं | और यह बहुत ही आनंद की बात होती हैं जब मनुष्य अपने गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता हैं | इन लभली कपल (भैया -भाभी) को असीमित शुभकामनाएं सहित विवाह की ढ़ेरो-ढ़ेर हार्दिक बधाई व प्यार, लभ बर्ड्स अपने नई पारी में भी तरक्की की ओर अग्रसर रहेंगे यही मेरी कामना रहेगी | दाम्पत्य जीवन सुखमय हो, खुशमय हो, हर कार्य शुभ-शुभ हो | माँ भवानी की कृपा सदैव इनपर बनी रहें |

Leave a comment